संस्कार
संस्कार शब्द का मूल अर्थ है, "शुद्धिकरण " | मूलतः संस्कार का अभिप्राय उन धार्मिक कृत्यों से था जो किसी व्यक्ति को अपने समुदाय का पूर्ण रूप से योग्य सदस्य बनाने के उद्देश्य से उसके शरीर, मन और मस्तिष्क को पवित्र करने के लिए किए जाते थे, किन्तु हिन्दू संस्कारों का उद्देश्य व्यक्ति में अभीष्ट गुणों को जन्म देना भी था | प्राचीन भारत में संस्कारों का मनुष्य के जीवन में विशेष महत्त्व था | संस्कारों के द्वारा मनुष्य अपनी सहज प्रवृतियों का पूर्ण विकास करके अपना और समाज दोनों का कल्याण करता था | ये संस्कार इस जीवन में ही मनुष्य को पवित्र नहीं करते थे, उसके पारलौकिक जीवन को भी पवित्र बनाते थे | हिन्दू धर्म में सोलह संस्कारों ( षोडश संस्कार ) का उल्लेख किया जाता है जो मानव को उसके गर्भाधान संस्कार से लेकर अंत्येष्टि क्रिया तक किए जाते हैं | आर्य समाज के योग्य पंडित, ब्राह्मण और विद्वानों से संस्कार करवाने हेतु हमारे हेल्पलाइन पर कॉल करें | यहाँ 16 संस्कारों का संक्षिप्त व...